Tuesday, January 5, 2010

अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-10)


खुदा के बारे में कांट्राडिक्शन के स्पष्टीकरण : 
साफ है कि खुदा के बारे में अध्ययन के समय जो कांट्राडिक्शन हमें दृष्टव्य होते हैं, उसमें भी उपरोक्त घटक जिम्मेदार हैं। यानि सीमित सोच, वैज्ञानिक नियमों की सीमा और वैज्ञानिक उपकरणों की सीमा। और ऐसा होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। क्योंकि खुदा ने सृष्टि की रचना की। प्रत्येक प्राणी सृष्टि का अंग है। स्पष्ट है कि मनुष्य द्वारा जिन नियमों की खोज की गयी या रचना की गयी उनकी कसौटी पर खुदा को नहीं परखा जा सकता।

लेकिन चूंकि इस पुस्तक में खुदा तक साइंटिफिक दृष्टि से पहुंचने की कोशिश की जा रही है इसलिए सबसे पहले पीछे इंगित किये गये कांट्राडिक्शन पर विचार करना जरूरी है।

खुदा हर जगह है लेकिन सृष्टि की किसी भी वस्तु से पूरी तरह अलग थलग है। ये दो परस्पर विरोधी विचार नास्तिकों के लिए एक मजबूत दलील का कार्य करते हैं। क्योंकि खुदा अगर किसी प्राणी में है तो उस प्राणी के प्रत्येक अणु और एटम से संलग्न रहेगा। तो फिर वह अलग कैसे हो सकता है? लेकिन थोड़ा गहराई में जाने पर इस एतराज में कोई दम नहीं दिखता। वास्तव में इस एतराज के पैदा होने की वजह है कि खुदा को भी दूसरे प्राणियों की तरह पदार्थिक मान लिया जाता है। जबकि धर्मग्रंथों से यह सिद्ध होता है कि खुदा एक महाशक्ति (Super Power) है। और महाशक्ति पदार्थ की मोहताज नहीं होती।

शक्ति या ऊर्जा का एक छोटा सा रूप प्रकाश है। एक ऐसे मैदान की कल्पना कीजिए जहां बहुत से लोग इकट्‌ठा हैं। सूर्य की प्रकाश किरणें पूरे मैदान को रोशन रखती हैं लेकिन वहां मौजूद कोई व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि प्रकाश उसके शरीर का या वहां उपस्थित किसी अन्य वस्तु का अंग है। 

इसमें कुछ लोग यह एतराज कर सकते हैं कि उस मैदान में बहुत सी जगहों पर प्रकाश नहीं पहुंचेगा। जैसे किसी ठोस चीज के नीचे, या जहां किसी व्यक्ति की परछाईं बन रही होगी। यहां यह जान लेना जरूरी है कि प्रकाश ऊर्जा का एक बहुत ही कमजोर रूप है। अगर ऊर्जा का शक्तिशाली विकिरण जैसे एक्स किरणें या गामा किरणें उस मैदान पर डाली जायें तो सम्पूर्ण मैदान का कोई भाग उनसे अछूता नहीं बचेगा। साथ ही साथ ये किसी वस्तु का हिस्सा भी नहीं बनेंगी। जब मामूली शक्तियों का यह हाल है तो इन शक्तियों के रचनाकर्ता के बारे में समझा जा सकता है कि ये बातें उसके लिए मामूली से भी कम हैं। इस प्रकार उपरोक्त विरोधाभास केवल गलत सोच का परिणाम है।

खुदा ने अपने बन्दों को किस प्रकार का बनाया है? बन्दों को किसी सीमा के अन्तर्गत कैद किया गया है, या उन्हें असीमित अधिकार दिये गये हैं? इन प्रश्नों के उत्तर के लिए हमें अल्लाह के ज़ाते पाक के तीन गुण अपने जहन में रखने पड़ेंगे, ज्ञान, न्यायप्रियता और हमेशा विद्यमान रहने वाला। 

3 comments:

सलीम ख़ान said...

achchha vishleshan

ab inconvenienti said...

कांट्राडिक्शन हमें दृष्टव्य होते हैं

पुस्तक में खुदा तक साइंटिफिक दृष्टि

इंगित किये गये कांट्राडिक्शन पर विचार

अणु और एटम से संलग्न रहेगा।

पदार्थिक मान लिया जाता है। जबकि धर्मग्रंथों से यह सिद्ध होता है कि खुदा एक महाशक्ति (Super Power)

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जो इन्सान दृष्टव्य, दृष्टि, इंगित, अणु, पदार्थिक, सिद्ध जैसे शब्द समझ सकता है वह विसंगति, अन्तर्विरोध, परस्पर-विरोध, विरुद्धता, वैज्ञानिक, परमाणु, महाशक्ति कैसे कठिन शब्द क्यों नहीं समझ सकेगा?

ईश्वर के अस्तित्व के बारे में तब तक कुछ कहना महामुर्खता है जब तक की इसे निर्विवाद प्रेक्षण अथवा गणितीय साक्ष्यों द्वारा सिद्ध नहीं कर लिया जाता. क्या आपके पास खुदा के होने का गणितीय साक्ष्य या प्रमेय या सिद्धांत है?

zeashan zaidi said...

"क्या आपके पास खुदा के होने का गणितीय साक्ष्य या प्रमेय या सिद्धांत है?"
जी हाँ. इस बारे में मैंने आगे विश्लेषण किया है.