Wednesday, September 8, 2010

सूक्ष्मजीवों की खोज किसने की?


आज की साइंस हमें बताती है कि दुनिया में ऐसे बारीक कीड़े या मखलूक़ात भी मौजूद हैं जिन्हें नंगी आँखों से नहीं देखा जा सकता। बहुत सी बीमारियां जैसे कि चेचक, हैज़ा, खसरा, टी.बी. वगैरह बहुत ही बारीक कीड़ों के ज़रिये होती हैं जिन्हें आँखों से नहीं देखा जा सकता। इन कीड़ों को बैक्टीरिया और वायरस कहा जाता है। ये कीड़े नुकसानदायक भी होते हैं और फायदेमन्द भी। चूंकि इस तरह का कोई भी कीड़ा इतना महीन होता है कि बिना माइक्रोस्कोप के देखा नहीं जा सकता इसलिये एक अर्से तक दुनिया इनके बारे में अंजान रही। फिर सत्रहवीं सदी में एक डच साइंसदाँ हुआ एण्टोनी लीवेनहोक जिसने माइक्रोस्कोप का अविष्कार किया। और उसकी मदद से पहली बार उसने इन सूक्ष्म कीड़ों का दर्शन किया।

यह तो वह इतिहास है जो हमें अपने स्कूल की किताबें पढ़ने से मिलता है। लेकिन सवाल ये पैदा होता है कि क्या वाकई एण्टोनी लीवेनहोक से पहले दुनिया इससे अंजान थी कि कुछ ऐसे भी कीड़े दुनिया में पाये जाते हैं जिन्हें नंगी आँखों से देखना नामुमकिन है? इसका जवाब पाने के लिए पढ़ें ये पोस्ट.  

5 comments:

दीपक 'मशाल' said...

लेकिन उन्हें कीड़े नहीं कह सकते भाई.. कीड़े यानि कीट ओर्थोपोडा फैमिली से ताल्लुक रखने वाले जीव होते हैं.. जीव कहना ही पर्याप्त है..

दीपक 'मशाल' said...

विज्ञान और क़ानून सबूत मांगते हैं जो कि सचित्र अंटोनी ल्यूवेनहोक ने ही दिए.. क्या आज कोई विज्ञान कथा लेखक परग्रहवासी के बारे में कुछ बताये या उसका विवरण दे तो आप मानेंगे?

मनोज कुमार said...

दीपक जी ने सही कहा है, जीव कर दीजिए।
या जीवाणू।
बाक़ी बड़े ही सरल ढंग से विषय को समझाने का अंदाज़ अच्छा लगा।

देसिल बयना-खाने को लाई नहीं, मुँह पोछने को मिठाई!, “मनोज” पर, ... रोचक, मज़ेदार,...!

zeashan haider zaidi said...

दीपक जी,
आपका कहना सही है की इन्हें 'वैज्ञानिक भाषा' में कीड़ा नहीं कह सकते. लेकिन आज भी विज्ञान की पृष्ठभूमि से अलग कोई व्यक्ति 'सूक्ष्मजीवी' शब्द आसानी से नहीं समझेगा. इसलिए आम आदमी को समझाने के लिए मैंने 'कीड़ा' शब्द प्रयोग किया. और फिर 'कीड़ा' या आर्थोपोड टर्म तो हमारे ही बनाए हुए हैं चीज़ों को समझने के लिए. मूल चीज़ तो 'अर्थ' है.

zeashan haider zaidi said...

दूसरी बात, अगर आज कोई व्यक्ति 'एलिएंस' के बारे में बताता है और पचास साल बाद वो एलिएंस दिख जाते हैं, तब तो आज के इस व्यक्ति को आपको सच्चा मानना ही पड़ेगा. कापरनिकस ने कहा था की पृथ्वी ब्रह्माण्ड का केंद्र नहीं है, लेकिन इसकी पुष्टि बहुत बाद में हुई. फिर क्यों कापरनिकस को ही उस खोज का खोजकर्ता माना जाता है?