Wednesday, January 20, 2010

अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-20)


अल्लाह हमेशा से है और हमेशा रहेगा। प्रथम दृष्टि में यह कथन कुछ अटपटा लगता है। क्योंकि जब हम अपने आसपास दृष्टि दौड़ाते हैं तो हर चीज नश्वर नजर आती है। और उसकी उत्पत्ति का एक सिरा मिल जाता है। कोई प्राणी कभी न कभी पैदा अवश्य होता है और एक समय बाद समाप्त हो जाता है। बड़ी बड़ी चट्‌टाने और पहाड़ भी वर्षों तक बनते हैं और एक युग बीतने के बाद समाप्त भी हो जाते हैं। यहां तक कि पृथ्वी सूर्य और तारे भी एक आयु रखते हैं और वैज्ञानिक गणनाओं के अनुसार एक समय आता है जब ये समाप्त हो जाते हैं। बिग बैंग सिद्धान्त के अनुसार सम्पूर्ण सृष्टि के पैदा होने का भी एक समय है। तो फिर अल्लाह के पैदा होने का कोई वक्त क्यों नहीं?


देखा जाये तो ये प्रश्न काफी उलझन भरा लगता है, लेकिन अगर हम गहराईपूर्वक विचार करें? एक वैज्ञानिक सिद्धान्त के अनुसार यूनिवर्स में समस्त द्रव्यमान व ऊर्जा का योग नियत है। इसे न तो कम किया जा सकता है और न बढ़ाया जा सकता है। इसे द्रव्यमान ऊर्जा संरक्षण का नियम कहते हैं। बहुत पहले ये नियम दो भागों में अलग अलग था द्रव्यमान संरक्षण का नियम और ऊर्जा संरक्षण का नियम। द्रव्यमान संरक्षण के नियम का उदाहरण है कोई रासायनिक अभिक्रिया, जिसमें अभिक्रिया के बाद नये पदार्थ बनते हैं। लेकिन अगर हम अभिक्रिया से पहले भाग लेने वाले समस्त पदार्थों का द्रव्यमान लें और अभिक्रिया के बाद बनने वाले पदार्थों का द्रव्यमान लें तो दोनों बराबर आते हैं। इस तरह द्रव्यमान न तो नष्ट होता है और न उत्पन्न किया जा सकता है। 



बाद में आइंस्टीन ने द्रव्यमान ऊर्जा के बीच एक नया सम्बन्ध दिया जिसमें द्रव्यमान और ऊर्जा नष्ट भी किये जा सकते हैं और उत्पन्न भी किये जा सकते हैं। हां यह जरूर है कि जितना द्रव्यमान नष्ट होता है उसके समान्तर ऊर्जा उत्पन्न हो जाती है। इस प्रकार द्रव्यमान ऊर्जा संरक्षण नियम की उत्पत्ति हुई जिसे नाभिकीय अभिक्रियाओं में देखा जा सकता है। 



इस प्रकार इस सिद्धान्त के अनुसार यूनिवर्स की समस्त ऊर्जा व द्रव्यमान का योग नियत है। तो क्या इसी के समान्तर हम यह नहीं मान सकते कि अल्लाह का वजूद नियत है? वह न तो कभी उत्पन्न हुआ और न कभी खत्म होगा।



बिग बैंग सिद्धान्त के अनुसार सम्पूर्ण सृष्टि प्रारम्भ में एक बिन्दु में समाहित थी। यूनिवर्स का सम्पूर्ण द्रव्यमान और ऊर्जा उस बिन्दु में मौजूद था। इससे पहले कि हम अल्लाह के बारे में सोचें कि वह कब पैदा हुआ, हमें इस समस्या पर पहले विचार करना पड़ेगा कि वह बिन्दु कहां से आया। और अगर वह बिन्दु हमेशा से था तो यह मानने में भी कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए कि अल्लाह का वजूद हमेशा से रहा है। यूनिवर्स एक बार फिर सिमटेगा और सिमटकर एक बिन्दु में समा जायेगा। लेकिन खुदा उसी तरह मौजूद रहेगा, बिना किसी तब्दीली के।


यहां ये स्पष्ट कर देना जरूरी है कि खुदा की तुलना द्रव्यमान ऊर्जा सिद्धान्त या बिग बैंग सिद्धान्त से नहीं की जा रही है। यह सब तो साधन मात्र हैं उस अजीम हस्ती के बारे में विचार करने के लिए जिसने हम सब की रचना की और विचार करने के लिए अद्भुत मस्तिष्क दिया।

4 comments:

दृष्टिकोण said...

भाईसाहब एक चीज दिमाग में रखकर चले कि भगवान अल्लाह गॉड इन सब को इन्सान ने बनाया है इन्होंने इंसान को नहीं बनाया। आपने इतनी अच्छी तरह से द्रव्य के अस्तित्व के सिद्धांत को समझाया लेकिन दिमाग में अल्लाह भरा होने से अंतः आप वहीं पहँुच गए जहाँ से चले थ। आज जब कि विज्ञान इतना विकसित है जिन इन्सानों प्रकृति की विभिषिकाओं से डरकर अल्लाह भगवान की कल्पना की उनके सामने सत्य असत्य को जॉचने का कोई साधन नहीं था आपके सामने तो है।

दृष्टिकोण
www.drishtikon2009.blogspot.com

अमिताभ श्रीवास्तव said...

vigyaan aour adhyaatm..
darasal inke beech jitani ladaai he, sab bakvaas ki baate he../yah to tay samajhiye janaab ki jo aastik he use us ishvar par vishvaas rahega, jo nastik he use nahi. jo bhi ho, kintu sach sirf yahi he ki he koi hamse upar jise aap drvya sidhhant se samjha dete ho to koi kisi any sidhhant se../bakvaas karne vaale karte rahe..aapke, mere sabke..us parvardigaar ko kyaa matlab, jo use yaad kartaa he, vo use bhi dekhataa he aour jo use nahi poojataa use bhi.../

zeashan zaidi said...

दृष्टिकोण जी, सत्य असत्य की जांच के बाद ही मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूँ की ईश्वर है. अगर आप के पास कोई ठोस दलील ईश्वर के न होने की है तो उसे अवश्य बताएं.

दृष्टिकोण said...

यह विषय किसी एक दलील से हल होने वाला नहीं है। फिलहाल में आपकों सलाह दूँगा शहीद ए आजम भगतसिंह का लेख मैं नास्तिक क्यों हूँ जरूर पढ़ें। बाकी तो दुनिया में काफी दलीले है जो साबित करती हैं कि इस दुनिया को इन्सान ने ही बनाया है किसी भगवान ने नहीं । लिंक हैं http://www.deshkaal.com/details.aspx?nid=20620092365039

दृष्टिकोण